संस्कृत सीखें

-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे

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पाठ - ०२

 

द्वितीयः पाठः
ॐ सहनाववतु सह नॊ भुनक्तु सहवीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै।।

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पठ धातु लृट लकार (भविष्य काल)

 

  एकवचन         द्विवचन         बहुवचन
अन्य पुरुष- पठिष्यति

 

पठिष्यतः  पठिष्यन्ति
मध्यम पुरुष पठिष्यसि  पठिष्यथः  पठिष्यथ
उत्तम पुरुष पठिष्यामि पठिष्यावः पठिष्यामः

 

आइये कुछ अव्ययों का प्रयोग करते हुए वाक्य निर्माण करें।

संस्कृत संभाषण अभ्यासः

 सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत

यत्र = जहां

तत्र = वहां

कुत्र ?= कहां?

अत्र = यहां

एकत्र = एक जगह

सर्वत्र = सब जगह

अन्यत्र = अन्य जगह

यदा = जब

तदा = तब

कदा ? = कब?

सर्वदा = हमेशा

एकदा = एक बार

अद्य = आज

श्वः = कल (आनेवाला)

ह्यः = कल (बीता हुआ)

 = और

अपि = भी

एव = ही

इदानीम् = इस समय

उपरि = ऊपर

अधः = नीचे

वामतः =वाँये

दक्षिणतः = दाहिने

पृष्ठतः = पीछे

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श्वः भवान् कुत्र गमिष्यति?         आप कल कहां जायेंगे?

अहं श्वः अमरीका देशं गमिष्यामि।     मैं कल अमरीका जाऊँगा।

किं भवती अपि चलिष्यति?           क्या आप भी चलेंगी?

न अहं न चलिष्यामि।             नहीं मैं नहीं चलूंगी।

किं भवान् चायं पास्यति ? क्या आप चाय पियेंगे?

अहं चायं न पिबामि अतः काफीं पास्यामि। मैं चाय नहीं पीता इसलिये काफी पिऊँगा।

यत्र यत्र धूमस्तत्र तत्र अग्निः। जहां जहां धुँआ है वहां वहां आग है।

यत्र कविः अस्ति तत्र कविता भवति। जहां कवि है वहां कविता होती है।

वायुः सर्वत्र प्रवहति। वायु सब जगह वहती है।

यदा सूर्यः उदयति तदा दिवसः भवति। जब सूर्य उगता है तब दिन होता है।

अद्य रविवासरः अस्ति। आज रविवार है।

इदानीं अहं एकां कवितां श्रावयिष्यामि। इस समय मैं एक कविता सुनाऊँगा।

सर्वे जनाः श्रोष्यन्ति कोऽपि गृहं न गमिष्यति। सब लोग सुनेंगे कोई भी घर नहीं जायेगा।

 

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